मध्य प्रदेश(MP) के प्रमुख ऐतिहासिक नगर एवं पुरातात्विक स्थल

By | January 23, 2019
मध्य प्रदेश(MP) के प्रमुख ऐतिहासिक नगर एवं पुरातात्विक स्थल के जानकारी

एम.पी.में पुरातत्व संग्रहालय एवं संचालनालय(Archaeological Museum and Directorate) की स्थापना 1956 को की गई| राज्य के संग्रामपुर में पहला पुरातत्व पार्क की स्थापना भी की गई है|

1. ओरछा:-

ओरछा मध्य प्रदेश का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक नगर है, जो टीकमगढ़ जिले में बेतवा नदी के तट पर मानिकपुर-झांसी रेल मार्ग पर स्थित है| ओरछा को राजा रूद्र प्रताप सिंह ने बसाया था |

दर्शनीय स्थल:- राजा राम मंदिर एवं राजामहल( निर्माण :मधुकर शाह द्वारा),जहांगीरी महल एवं सावन भादो महल(राजा वीर सिंह देव),चतुर्भुज मंदिर,लक्ष्मी नारायण मंदिर,राय प्रवीण महान(राजा इंद्र महल ),फूल बाग,शीश महल,बेतवा नदी के कंचनघाट पर राजाओं की स्मृतियों में बनाई गई ओरछा की 14 छतरियां और शहीद स्मारक,राजा रूद्र प्रताप सिंह के द्वारा निर्मित ओरछा का किला प्रमुख दर्शनीय और धार्मिक स्थल है| मान्यताओं के अनुसार मधुकर शाह की पत्नी महारानी गणेश कुंअर द्वारा लगभग 400 वर्ष पूर्व अयोध्या से लाई गई श्री राम की मूर्ति को मधुकर शाह द्वारा एक राजा के रूप में उनका राज्य अभिषेक किया गया तब से अब तक यहां स्वयं मध्य प्रदेश शासन के नौजवानों द्वारा सूर्योदय पूर्व एवं सूर्यास्त के पश्चात राजा राम को ‘गॉड ऑफ ऑनर’ दिया जाता है|

2. भरहुत :- 

तना जिले के निकट स्थित भरहुत शुंग कालीन स्तूप के लिए प्रसिद्ध है, परंतु आज के अवशेष मात्र बचे हैं| भरहुत का निर्माण मौर्य सम्राट अशोक ने कराया था| भरहुत स्तूप का पता सर्वप्रथम 1873 में  कनिंघम महोदय द्वारा कराया गया था| सांची शिल्प कला से काफी समानता रखता है|

3. एरण :-

एरण  मध्य प्रदेश के सागर जिले के अंतर्गत विंध्याचल पर्वतमाला के उत्तर में एक पठार पर बेतवा नदी के किनारे स्थित है चाहत गुप्तकालीन अनेक अभिलेख प्राप्त हुए हैं| मध्यप्रदेश में  भारतीय इतिहास में सती प्रथा का प्रमाण एरण अभिलेख से मिलता है जोगुप्त शासक भानु गुप्त से संबंधित है| सम्राट समुद्रगुप्त के एक शिलालेख में एरण को ‘एरिकिण’ कहां गया| इसके अतिरिक्त हूण शासकों की मुद्राएं, गुप्तकालीन  वराह मंदिर, विष्णु मंदिर, नरसिंह मंदिर  ध्वस्त अवस्था में पाए गए|

4. भोजपुर:-

भोपाल के निकट स्थित एक प्राचीन नगर है इस स्थान पर भारत में सबसे ऊंचा शिवलिंग शिव मंदिर है| इस मंदिर को मध्य भारत का सोमनाथ कहा जाता है| भोजपुर की स्थापना राजा भोज द्वारा की गई थी|

5.कायथा :-

कायथा संस्कृति ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व की है जिसकी खोज श्री वाकणकर द्वारा की गई थी| कायथा उज्जैन के कालीसिंध नदी के समीप ही स्थित है| यह बुद्ध काल की बुद्ध प्रतिमा, तांबे की चूड़ियाँ, मनको के हार,कुल्हाड़ियाँ आदि भी प्राप्त हुई है|

6. आदमगढ़:-

इस स्थान का उत्खनन आर.व्ही.जोशी एवं एम.डी.खरे  के मार्गदर्शन  कराया गया| आदमगढ़ मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले के नर्मदा नदी के तट पर स्थित है| यहां पुरापाषाण  औजार, हड्डियों के टुकड़े, चूड़ियां, कांच के टुकड़े  आदि प्राप्त हुए हैं| आदमगढ़ की  पहाड़ी गुफा के लिए भी प्रसिद्ध है, आदिमानव  पत्थरों को तराश कर नुकीले  औजार बनाया करते थे| जिराफ की पेंटिंग,हाथी,घुड़सवार, युद्ध करके सैनिकों की चित्रकला, रॉक पेंटिंग के प्रमाण प्राप्त हुए है|

7. त्रिपुरी :-

त्रिपुरी का वर्तमान नाम ‘तेवर’ है|त्रिपुरी प्राचीन काल में कलचुरी और चेदी वंश राजाओं की राजधानी थी, जो जबलपुर के निकट नर्मदा के तट पर  भेड़ाघाट के नजदीक स्थित है| 1939 में कांग्रेस का 52 वाँ ऐतिहासिक अधिवेशन यहीं पर हुआ था| सुभाष चंद्र बोस को यही कांग्रेस की अध्यक्षता का पद प्राप्त हुआ था|

8. दशपुर:-  

दशपुर एक प्राचीन नगर है, गुप्त शासक कुमारगुप्त द्वितीय के शासनकाल का एक अभिलेख यहा से प्राप्त हुआ है जिसमें रेशम के व्यापारियों का वर्तमान गुजरात मे बसने एवं सूर्य मंदिर के निर्माण का उल्लेख मिलता है|

9.भीमबेटका:-

भीमबेटका की खोज डॉ विष्णु वाकणकर द्वारा की गई थी | भीमबेटका रायसेन जिले में स्थित है|  आदि मानव द्वारा निर्मित रंगीन से चित्रों के कारण भीमबेटका की गुफाएं संपूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है|यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर की सूची में सम्मिलित किया है| इस स्थान का नाम भीम जैसे विशाल चट्टान के कारण भीमबेटका पड़ा| या 600 से अधिक गुफाएं  है| विश्व का सबसे बड़ा प्रागैतिहासिक कालीन  गुफा समूह कहा जाता है|

10.खजुराहो :-

खजुराहो को  प्राचीन काल में जैजाकभुक्ति के नाम से भी जाना जाता था| जैजाकभुक्ति मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में चंदेल शासकों द्वारा निर्मित खजुराहो मंदिर विश्व प्रसिद्ध है|  जैजाकभुक्ति के चंदेल राजाओ की धार्मिक राजधानी थी| अधिक मंदिरों का निर्माण धंग के शासनकाल में हुआ था| अधिकांश मंदिर नागर शैली में निर्मित है| यहां के प्रमुख मंदिर चौसठ योगिनी, आदिनाथ,पार्श्वनाथ और महादेव मंदिर है| अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन सर्वाधिक आते हैं इस स्थान पर  वैष्णव, जैन,शैव धर्म से संबंधित अनेक मंदिर है| जिन पर मैथुन  एवं रति क्रीड़ा मूर्तिकला   चित्रित की गई है|

11. जटकरा (खजुराहो, जिला छतरपुर):-

भारतीय पुरातत्व के द्वारा  सर्वेक्षण के समय विशाल मंदिर होने के प्रमाण मिले हैं|

12.हथनौरा ( जिला होशंगाबाद) :-

हथनौरा पुरातात्विक खुदाई में  मानव खोपड़ी के कंकाल प्राप्त हुए हैं,जो पुरापाषाण की जानकारी देता है|

13. पीतनगर( खरगौन) :-

बौद्ध कालीन अवशेष प्राप्त हुए है

14. निनौर गांव :-

सीहोर के निनौर गांव गुप्त कालीन वास्तुकला  के अवशेष प्राप्त हुए हैं|

15.खलघाट :-

धार जिले के खलघाट स्थान से ताम्रकालीन सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए|


Madhya Pradesh ke Pramukh aitihaasik nagar, Historical town and Archaeological Site in mp

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