मध्यप्रदेश की प्रमुख गुफाएँ (Important Caves of MP)

By | January 30, 2019
बाघ की गुफाएँ(Baagh Caves) :-

भित्ति चित्रों के कारण इन गुफाओं को महाराष्ट्र की अजंता की गुफाओं के समाकालीन माना जाता है| इसकी खोज 1818 में की गई| बाघ की गुफाएँ जिला धार,विंध्याचल की पहाड़ियों में नर्मदा नदी की सहायक बाघिनी नदी के पास ग्राम बाघ में स्थित है | इनका निर्माण गुप्त शासकों ने कराया था| रंगीन चित्र कार्यकारिणी के कारण ‘रंगमहल’ भी कहते हैं| इसके अलावा बौद्ध विहारों  के रूप में विकसित किया गया, इसीलिए इन्हें ‘बौद्ध चित्र के प्राण’ भी कहा जाता है| इनकी कुल संख्या 9 है, जिसमें पहली गुफा को ‘गृह गुफा’,दूसरी गुफा को ‘पांडव गुफा’ तीसरी को ‘हाथीखाना’ और चौथी को ‘रंगमहल’, 5 और 6 वीं गुफा को ‘सभामंडप’ एवं 7,8,9  के अवशेष मात्र बचे है | 1953 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्मारक रूप में घोषित किया था|

 

उदयगिरि की गुफाएँ(Udayagiri caves) :

उदयगिरि की गुफाएँ विदिशा जिले में स्थित है| इन गुफाओं का निर्माण गुप्त राजा चंद्रगुप्त के मंत्री वीरसेन दौरा किया गया था| यहां कुल 20 गुफाएं है, जिसमें गुफा नंबर 5 में विष्णु के अवतार ‘वराह अवतार’ की मूर्ति स्थापित है| गुफा नंबर 4 में शिवलिंग प्रतिमा बनी है | 

Udayagiri guphaen

पांडव की गुफाएँ (Pandav Cave):-

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन पचमढ़ी में पांडव की  5 गुफाएँ है| ऐसा माना जाता है कि पांडवों ने वनवास के समय 1 वर्ष का अज्ञातवास के रूप में बिताया था,इसी कारण इसे पांडव की गुफाएँ कहा जाता है| पुरातात्विक सर्वेक्षण के अनुसार यह गुप्तकालीन एवं बौद्ध भिक्षुओं द्वारा बनाई गई होगी| यहाँ पर ‘द्रोपदी कोठरी’ और ‘भीम कोठरी’ देखी जा सकती है|  

बिलौवा की गुफाएँ(Caves of Bilava) :

बिलौवा की गुफाओं में शैव प्रतिमाएं है,जो ग्वालियर जिले में स्थित है| जिसका निर्माण 11 वीं शताब्दी में किया गया था|

कबरा गुफाएँ(kabara Caves) :-

इनका निर्माण 5 वीं शताब्दी में रायगढ़ जिले में किया गया था| इस गुफाओं की कुल संख्या 11 देखने को मिलती है | दीवारों पर चित्रकारी,आकृतियों को गेरूए और पीले रंग से बनाया गया है |

भर्तृहरि गुफाएँ(Bhatrhari Caves) :-

भर्तृहरि की गुफाएँ  क्षिप्रा नदी के पास उज्जैन में स्थित है| यहाँ कुल 9 गुफाएँ खंडित और सकरी अवस्था में है| ऐसा माना जाता है कि यहां राजा भर्तृहरि द्वारा तपस्या की गई थी| इस गुफा के अंदर राजा भर्तृहरि की प्रतिमा भी है| गुफा नंबर 2 भर्तृहरि के भतीजे गोपीचंद की है|

आदमगढ़ की गुफाएँ(Aadamagadh Caves) :-

आजमगढ़ की पहाड़ियां एक प्रमुख पर्यटन स्थल जो मध्य प्रदेश के होशंगाबाद के दक्षिण में 3 किलोमीटर दूरी पर स्थित है| पाषाण और मध्य पाषाण काल की 5 से 8 हजार वर्ष पुराना शैलचित्र कला / रॉक पेंटिंग(Rock painting) के लिए बहुत प्रसिद्ध है | भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा 15 एकड़ में पर्यटन के पार्क बनाने की योजना भी चल रही है| यहाँ गाय,हिरण,जिराफ आकृतियां, सैनिको,घुड़सवार,मानव आकृतियां बनाई गई है| चित्रकारी के लिए गेरू ,चुना आदि का भी उपयोग किया है | आदि मानव द्वारा निर्मित पहाड़ियों के ऊपर नुकीले पत्थरों से बने हथियारों के प्रमाण भी मिले हैं|  

भीमबेटका की गुफाएँ(Caves of Bhimbetka)

यह विश्व का सबसे बड़ा प्रागैतिहासिक कालीन गुफा समूह है| महाभारत के भीम के नाम पर इसका नाम भीमबेटका( भीम+वाटिका) पड़ा| यहाँ अनेक मध्य पाषाण कालीन रंगीन शैलचित्र प्राप्त हुए| जो 12000 साल पहले तक के हैं| इन्हें 1957 में विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के डॉ विष्णु श्रीधर वाकणकर ने खोजा था| यह रायसेन जिले में भोपाल से लगभग 40 किलोमीटर दूरी पर रातापानी अभयारण्य में स्थित  है| यहा 750 गुफाओं का समूह है, जिसका निर्माण आदिमानव द्वारा किया गया है| यहाँ विभिन्न सामुदायिक घटनाओं का चित्रण  जैसे :- जीवन मरण,शिकार खेलना आदि का लाल, सफेद,हरे,पीले रंगों का प्रयोग कर रंगीन चित्रकारी की गई है|

2003 में इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर(UNESCO World Heritage site) सूची में शामिल किया है| 1990 में  इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण(Archaeological Survey of India) द्वारा राष्ट्रीय महत्व का बताया है|

Bhimbetka kee guphaen

माड़ा की गुफाएं(Caves of Mada ) सिंगरौली :-

यह प्राचीन भारत की बहुमूल्य धरोहर रॉक कट आर्किटेक्ट के लिए जानी जाती है, जो प्रागैतिहासिक कालीन गुफा  मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के माड़ा में सातवीं आठवीं सदी में बनी है| जिसकी समानता अजंता और एलोरा की गुफाओं से की जाती है| गणेश और शंकर माड़ा गुफा,रावण माड़ा गुफा,विवाह माड़ा गुफा शैल चित्रों के प्रमाण मिलते हैं| इन पहाड़िया का विस्तार लगभग 8 किलोमीटर की रेंज तक है|

Mada kee guphaen

मगेंद्रनाथ की गुफाएँ :-

रायसेन जिले के  बरेली तहसील के पाटनी के  समीप स्थित है|

शंकराचार्य की गुफाएँ (ओंकारेश्वर) :- Click More 


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